हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नगरोटा बगवां क्षेत्र के नैना देवी मंदिर के आसपास भीषण जंगल की आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और मंदिर परिसर को चारों तरफ से घेर लिया। उस समय मंदिर में भंडारे और जगराते का आयोजन चल रहा था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
आग इतनी तेजी से फैली कि मंदिर में मौजूद करीब 200 श्रद्धालु, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे, वहीं फंस गए। मंदिर तक जाने वाली सड़क के दोनों ओर कई किलोमीटर तक आग फैल गई, जिससे बाहर निकलने का रास्ता लगभग बंद हो गया। श्रद्धालुओं के बीच दहशत का माहौल बन गया और लोग मदद की गुहार लगाने लगे।
सूचना मिलते ही प्रशासन, फायर ब्रिगेड, वन विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। सबसे पहले सड़क किनारे लगी आग पर काबू पाने की कोशिश की गई ताकि सुरक्षित निकासी का रास्ता बनाया जा सके। कई घंटों तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
अधिकारियों के अनुसार तेज हवाओं और सूखे जंगल की वजह से आग तेजी से फैल रही थी। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो आसपास के हजारों लोगों पर इसका असर पड़ सकता था। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
समय पर शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन ने 200 से ज्यादा श्रद्धालुओं की जान बचा ली और एक संभावित त्रासदी को टाल दिया। इस घटना ने एक बार फिर जंगल की आग के बढ़ते खतरे और आपदा प्रबंधन की अहमियत को उजागर कर दिया है।