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Saturday, 06 Jun 2026
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यूपी एनकाउंटर पर फिर छिड़ी सियासत! 2017-2024 के आंकड़ों में 138 हिंदू और 67 मुस्लिम अपराधी ढेर

उत्तर प्रदेश में गाजीपुर के चर्चित कमलेश बिंद एनकाउंटर के बाद एक बार फिर पुलिस मुठभेड़ों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां एनकाउंटर की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं योगी सरकार इसे अपराध और माफिया के खिलाफ अपनी "जीरो टॉलरेंस" नीति का हिस्सा बता रही है।

सामने आए आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2017 से 5 सितंबर 2024 के बीच उत्तर प्रदेश में कुल 207 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। इनमें 138 हिंदू और 67 मुस्लिम शामिल बताए गए हैं। जातीय आधार पर देखें तो 20 ब्राह्मण, 18 ठाकुर, 16 यादव, 17 गुर्जर-जाट, 14 अनुसूचित जाति, 3 अनुसूचित जनजाति, 2 सिख, 8 अन्य ओबीसी और 42 अन्य वर्गों के अपराधी भी मुठभेड़ों में मारे गए।

रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2017 से मई 2026 तक सबसे अधिक पुलिस मुठभेड़ें मेरठ जोन में हुईं, जहां 4,813 एनकाउंटर दर्ज किए गए। इसके बाद आगरा और वाराणसी जोन का स्थान रहा। इसी अवधि में हजारों अपराधियों की गिरफ्तारी और सैकड़ों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

योगी सरकार का दावा है कि सख्त पुलिसिंग, माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट और बुलडोजर जैसी नीतियों के चलते प्रदेश में अपराध का ग्राफ घटा है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि एनकाउंटर की कार्रवाई को लेकर निष्पक्षता और प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं।

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath लगातार सार्वजनिक मंचों से अपराधियों को चेतावनी देते रहे हैं कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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