पुरुषोत्तम मास के अवसर पर मथुरा स्थित गुरु कृपा विलास में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस श्रद्धालु भगवान श्रीराम की दिव्य बाल लीलाओं का रसपान कर भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास शान्तनू महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्म, नामकरण संस्कार और गुरुकुल जीवन का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कारों का महत्व बताया।
कथा के दौरान महाराज ने बताया कि जन्म के 11वें दिन महर्षि वशिष्ठ द्वारा चारों राजकुमारों का नामकरण संस्कार किया गया था। ज्येष्ठ पुत्र का नाम राम, कैकेयी पुत्र का नाम भरत तथा सुमित्रा के दोनों पुत्रों के नाम लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे गए। उन्होंने उपनिषदों के आधार पर श्रीराम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिस नित्यानंद स्वरूप, अनंत चिन्मय परमात्मा में योगीजन रमण करते हैं, वही परम सत्ता श्रीराम हैं।
कथा में भगवान श्रीराम के यज्ञोपवीत संस्कार, गुरुकुल शिक्षा और माता-पिता व गुरुजनों के प्रति उनके आदर्श व्यवहार का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अनुभव किया।
कार्यक्रम के यजमान प्रभात अग्रवाल (पीके-पीके ज्वैलर्स) ने बताया कि पंचम दिवस पर भव्य श्रीराम बारात निकाली जाएगी। इसके लिए विशेष रूप से जनकपुरी सजाई जाएगी और चारों भाइयों की आकर्षक झांकियां घोड़ों पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगी। कथा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।